भारत की सरकारी एजेंसियों और निजी कंपनियों को मिला उन्नत AI मॉडल 'माइथोस' का एक्सेस, 10 करोड़ से अधिक लोगों का डेटा हो सकता है सुरक्षित
नई दिल्ली: भारत की कुछ सरकारी एजेंसियों और निजी क्षेत्र की कंपनियों को अमेरिकी AI कंपनी Anthropic द्वारा विकसित उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल "माइथोस (Mythos)" तक पहुंच प्रदान की गई है। सूत्रों के अनुसार यह सुविधा कंपनी की प्रोजेक्ट ग्लासविंग (Project Glasswing) पहल के विस्तार के तहत दी गई है।
मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, वर्तमान में जिन भारतीय संस्थानों को माइथोस मॉडल का एक्सेस मिला है, उनकी संख्या एकल अंक (Single Digits) में है और इनमें सरकारी तथा निजी दोनों प्रकार के संगठन शामिल हैं।
हालांकि, किन भारतीय संगठनों को यह सुविधा प्रदान की गई है, इसका खुलासा नहीं किया गया है। रिपोर्ट प्रकाशित होने तक Anthropic की ओर से भी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई थी।
क्या है माइथोस AI मॉडल?
माइथोस एक उन्नत AI मॉडल है जिसे सॉफ्टवेयर में मौजूद सुरक्षा कमजोरियों (Security Vulnerabilities) की पहचान करने और साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए विकसित किया गया है।
प्रोजेक्ट ग्लासविंग का उद्देश्य महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों को साइबर हमलों से सुरक्षित रखना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत चयनित संगठनों को Claude Mythos Preview नामक विशेष AI मॉडल का उपयोग करने की अनुमति दी जाती है।
दुनिया भर में बढ़ाया गया कार्यक्रम
जब अप्रैल में इस पहल की शुरुआत हुई थी, तब इसमें लगभग 50 वैश्विक साझेदार शामिल थे। पिछले सप्ताह इस कार्यक्रम का विस्तार करते हुए 15 से अधिक देशों के करीब 150 नए संगठनों को इसमें जोड़ा गया।
इनमें बिजली, जल आपूर्ति, स्वास्थ्य सेवाएं, संचार और हार्डवेयर अवसंरचना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े संस्थान शामिल हैं।
2 जून को जारी एक बयान में Anthropic ने कहा कि नए साझेदारों में कई ऐसी कंपनियां और गैर-लाभकारी संस्थाएं शामिल हैं, जिनके सॉफ्टवेयर को दुनिया भर की सरकारें और विभिन्न संगठन उपयोग करते हैं।
कंपनी के अनुसार, इन संस्थानों पर सफल साइबर हमला होने की स्थिति में 10 करोड़ से अधिक लोगों पर प्रभाव पड़ सकता है।
माइथोस से क्या होंगे फायदे?
माइथोस मॉडल की मदद से भाग लेने वाले संगठन:
- अपनी डिजिटल प्रणालियों में सुरक्षा खामियों की पहचान कर सकेंगे।
- साइबर सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता का परीक्षण कर सकेंगे।
- सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को तेजी से दूर कर सकेंगे।
- साइबर हमलों के खिलाफ अपनी सुरक्षा क्षमता को मजबूत बना सकेंगे।
Anthropic के अनुसार, इस पहल के माध्यम से अब तक 10,000 से अधिक गंभीर सॉफ्टवेयर कमजोरियों की पहचान की जा चुकी है।
AI के खतरों को लेकर भी चेतावनी
एक अलग ब्लॉग पोस्ट में Anthropic ने अग्रणी AI कंपनियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के तेज विकास को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी है।
कंपनी ने चेतावनी दी कि भविष्य में अत्यधिक उन्नत AI सिस्टम अपनी क्षमताओं को स्वयं तेजी से विकसित करने में सक्षम हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में वे मानवीय निगरानी से आगे निकल सकते हैं, जिससे समाज के लिए व्यापक जोखिम पैदा होने की आशंका है।
Source: Dainik Jagran
