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India Oil Demand: भारत 44%, बाकी दुनिया सिर्फ 5%, रूसी CEO ने कह दिया- बहुत खास है नई दिल्‍ली का स्‍थान

India Oil Demand: भारत 44%, बाकी दुनिया सिर्फ 5%, रूसी CEO ने कह दिया- बहुत खास है नई दिल्‍ली का स्‍थान

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06 Jun 2026 63 views 2 min read
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नई दिल्ली: रूस की दिग्गज तेल कंपनी रोसनेफ्ट के सीईओ इगोर सेचिन के अनुसार, आने वाले एक दशक में वैश्विक तेल मांग (ग्लोबल ऑयल डिमांड) में होने वाली वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा भारत से आएगा।

रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS द्वारा शनिवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सेचिन ने सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक तेल बाजार में भारत का विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है।

सेचिन ने कहा:

“अगले दस वर्षों में वैश्विक तेल मांग में होने वाली वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा इसी देश (भारत) से आएगा।”

भारत में तेल खपत में तेज वृद्धि

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुमानों का हवाला देते हुए सेचिन ने कहा कि:

  • वर्ष 2035 तक भारत की तेल खपत लगभग 80 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंचने की उम्मीद है।
  • यह तेल मांग में 44 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।
  • इसके मुकाबले, इसी अवधि में कुल वैश्विक तेल मांग में केवल 5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।

रूसी तेल से भारत और चीन को फायदा

रोसनेफ्ट प्रमुख ने यह भी कहा कि अप्रैल 2022 से रूसी तेल की आपूर्ति ने भारत और चीन दोनों को महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ पहुंचाए हैं।

सेचिन का दावा है कि:

  • इन लाभों का कुल मूल्य 40 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है।
  • भारत और चीन के साथ रूस की आर्थिक साझेदारी ने स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद की है।
  • ऊर्जा बाजारों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के कारण रूस को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं (ग्लोबल सप्लाई चेन्स) से अलग नहीं किया जा सकता।

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चेतावनी

सेचिन ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाली आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा आने पर दुनिया भर में उर्वरक और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हो सकती है।

उन्होंने कहा कि भारत उन देशों में शामिल है जो ऐसी बाधाओं से सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।

TASS की रिपोर्ट में सेचिन के हवाले से कहा गया है कि:

  • वर्ष के पहले चार महीनों में उर्वरकों की कीमतों में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
  • आपूर्ति में व्यवधान और प्रभावित बाजारों में रणनीतिक भंडार की कमी ने वैश्विक खाद्य संकट के जोखिम को बढ़ा दिया है।

सबसे अधिक जोखिम वाले देश और क्षेत्र

सेचिन ने कहा कि यदि उर्वरक आपूर्ति में बाधा आती है, तो खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में शामिल होंगे:

  • भारत
  • अफ्रीकी देश
  • दक्षिण-पूर्व एशिया के राष्ट्र

इन अर्थव्यवस्थाओं पर कृषि इनपुट लागत में वृद्धि और वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है।

स्रोत: नवभारत टाइम्स

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