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पुष्पक (RLV): भारत की पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि

पुष्पक (RLV): भारत की पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष तकनीक में एक और बड़ी उपलब्धि

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27 May 2024 35 views 3 min read
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भारत ने अपने महत्वाकांक्षी पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण यान (Reusable Launch Vehicle - RLV) कार्यक्रम में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पुष्पक (RLV-LEX-02) नामक पंखों वाला यान सफलतापूर्वक परीक्षण उड़ान के बाद कर्नाटक के एक रनवे पर उतरा।

इसरो (ISRO) के अध्यक्ष एस. सोमनाथ ने इस मिशन की "उत्कृष्ट और सटीक" सफलता की सराहना की। इसरो ने गर्व के साथ घोषणा की कि भारत ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया है।

इस वास्तविक परिस्थितियों पर आधारित परीक्षण में पुष्पक को भारतीय वायुसेना के एक हेलीकॉप्टर से छोड़ा गया। इसके बाद इसने पूरी तरह स्वायत्त (Autonomous) तरीके से रनवे पर सफल लैंडिंग की, जिससे अंतरिक्ष से वापसी जैसी वास्तविक परिस्थितियों का सफल अनुकरण किया गया। इसरो के अनुसार, यान ने स्वयं रनवे की ओर बढ़ते हुए आवश्यक समायोजन किए और अत्यंत सटीकता के साथ उतरने में सफलता प्राप्त की। लैंडिंग के बाद इसने ब्रेक पैराशूट, लैंडिंग गियर ब्रेक और नोज-व्हील स्टीयरिंग सिस्टम की सहायता से सुरक्षित रूप से रुकने की प्रक्रिया पूरी की।

यह पुष्पक की तीसरी सफल उड़ान थी, जिसने यह साबित किया कि यह कठिन परिस्थितियों में भी स्वायत्त लैंडिंग करने में सक्षम है। यद्यपि इसे वास्तविक मिशनों में उपयोग किए जाने में अभी कुछ वर्ष लग सकते हैं, लेकिन प्रत्येक सफल परीक्षण भारत को अंतरिक्ष प्रक्षेपण को अधिक किफायती, कुशल और टिकाऊ बनाने के अपने लक्ष्य के और करीब ले जा रहा है।

यह उपलब्धि गर्व का विषय है क्योंकि इसरो ने एक ऐसा कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया है जो अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। यह मिशन दर्शाता है कि समर्पण, नवाचार और दृढ़ संकल्प के बल पर कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं।

RLV-LEX-02 प्रयोग

इसरो ने एक बार फिर अपनी तकनीकी उत्कृष्टता का प्रदर्शन किया जब पुष्पक (RLV-TD) ने भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर से निर्धारित स्थिति से छोड़े जाने के बाद अत्यंत सटीक और स्वायत्त लैंडिंग की। यह परीक्षण भारत की उन्नत एयरोस्पेस क्षमताओं का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

पुष्पक की भविष्य की संभावनाएँ

पुष्पक जैसे यान भविष्य में अंतरिक्ष गतिविधियों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं। प्रक्षेपण लागत कम करने के अलावा, ये यान कक्षा में मौजूद उपग्रहों को ईंधन उपलब्ध कराने, खराब हो चुके उपग्रहों को वापस लाने तथा उनकी मरम्मत करने जैसे कार्यों में भी उपयोगी हो सकते हैं। इससे अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे (Space Debris) की समस्या को कम करने में भी सहायता मिलेगी।

दस वर्षों का अनुसंधान, परीक्षण और विकास

पुष्पक परियोजना अंतरिक्ष तकनीक में भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता और नवाचार की भावना को दर्शाती है। पिछले दस वर्षों में अनेक वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

वर्ष 2016 में RLV तकनीकी प्रदर्शक (Technology Demonstrator) को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपित किया गया था। इसने अपनी निर्धारित उड़ान सफलतापूर्वक पूरी की और बंगाल की खाड़ी में बनाए गए एक आभासी रनवे क्षेत्र में उतरने का प्रदर्शन किया। हालांकि, योजना के अनुसार इसे पुनः प्राप्त नहीं किया जा सका और यह समुद्र में डूब गया।

इसके बाद 2 अप्रैल 2023 को कर्नाटक के चित्रदुर्ग एरोनॉटिकल टेस्ट रेंज में एक और महत्वपूर्ण परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। RLV-LEX प्रयोग के दौरान भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर ने इस पंखों वाले यान को निर्धारित ऊँचाई तक पहुँचाया और फिर उसे छोड़ा। इसके बाद पुष्पक ने पूरी तरह स्वायत्त रूप से सुरक्षित लैंडिंग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया।

2016, 2023 और 2024 में सफल परीक्षणों के माध्यम से पुष्पक ने यह सिद्ध किया है कि भारत पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष परिवहन तकनीक के क्षेत्र में लगातार प्रगति कर रहा है।

प्राचीन भारतीय ग्रंथों में वर्णित पौराणिक पुष्पक विमान से प्रेरित यह परियोजना अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी नेतृत्व प्राप्त करने की भारत की महत्वाकांक्षा को दर्शाती है। निरंतर सरकारी सहयोग, निवेश और वैज्ञानिक नवाचार के बल पर भारत पुन: प्रयोज्य प्रक्षेपण तकनीक विकसित करने वाले अग्रणी देशों की श्रेणी में शामिल होने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

स्रोत: इसरो (ISRO) एवं भारतीय वायुसेना (IAF)

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