धनबाद में लो वोल्टेज की गंभीर समस्या, बिजली विभाग की कार्यशैली से उपभोक्ताओं में नाराजगी
धनबाद: कोयलांचल धनबाद के कई इलाकों में इन दिनों लो वोल्टेज की समस्या लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई है। बढ़ती गर्मी के बीच पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से आम जनता का जनजीवन प्रभावित हो रहा है। घरों में लगे पंखे, कूलर, फ्रिज, पानी की मोटर और अन्य विद्युत उपकरण ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं, जिससे लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई क्षेत्रों में लंबे समय से बिजली का वोल्टेज सामान्य स्तर से काफी कम रहता है। शाम के समय स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब बिजली की मांग बढ़ने के साथ-साथ वोल्टेज में और गिरावट आ जाती है। इसके कारण न केवल घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब होने का भी खतरा बना रहता है।
समस्या का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं की जा रही है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि जूनियर इंजीनियर (JE) और बिजली बोर्ड के मिस्त्रियों को कई बार फोन करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया जाता। कई बार अधिकारी और कर्मचारी फोन उठाने से भी बचते हैं, जिससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
निवासियों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उन्हें यह जानकारी नहीं दी जाती कि समस्या कब तक दूर होगी। विभाग की ओर से उचित संवाद और त्वरित कार्रवाई के अभाव में उपभोक्ताओं को घंटों और कई बार दिनों तक परेशानी झेलनी पड़ती है।
इस समस्या का असर केवल घरों तक सीमित नहीं है। छोटे व्यापारियों, दुकानदारों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को भी लो वोल्टेज के कारण नुकसान उठाना पड़ रहा है। कई व्यवसाय बिजली पर निर्भर हैं और अस्थिर वोल्टेज के कारण उनके कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
धनबाद के लोगों ने बिजली विभाग और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि लो वोल्टेज की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने, खराब ट्रांसफार्मरों और जर्जर लाइनों की जांच करने तथा शिकायतों के त्वरित निपटारे के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
कोयला नगरी के रूप में देशभर में पहचान रखने वाला धनबाद बेहतर बिजली व्यवस्था का हकदार है। लेकिन मौजूदा हालात यह सवाल खड़ा करते हैं कि आखिर आम उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से कब लिया जाएगा। यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए तो लोगों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं तथा विभाग के प्रति जनता का विश्वास और कमजोर हो सकता है।
